Extended spiritual practices spanning multiple days for specific goals. Powerful mantras and rituals performed by dedicated pandits.
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पूजा सारथी के माध्यम से जब आप महामृत्युंजय पूजा या मंत्र जाप का अनुष्ठान कराते हैं, तो यह केवल एक पूजा नहीं रह जाती, बल्कि पूरी तरह से शास्त्रों के नियमों के अनुसार और बेहद प्रामाणिक तरीके से संपन्न होने वाली एक आध्यात्मिक यात्रा बन जाती है। भगवान शिव का यह सबसे शक्तिशाली अनुष्ठान जीवन से बड़े से बड़े संकट, बीमारी और अकाल मृत्यु के भय को टालने के लिए किया जाता है। आइए जानते हैं कि पूजा सारथी के साथ मिलकर आप इस महा-अनुष्ठान को कितनी दिव्यता और सरलता से पूरा कर सकते हैं। पूजा सारथी के साथ महामृत्युंजय अनुष्ठान क्यों है विशेष? जब आप इस पावन कार्य के लिए पूजा सारथी को चुनते हैं, तो आपको निम्नलिखित विशेषताएं मिलती हैं: विद्वान एवं अनुभवी ब्राह्मण: इस महामंत्र के सवा लाख (1,25,000) या 11,000/21,000 जप के लिए केवल उन्हीं वैदिक पंडितों को नियुक्त किया जाता है जो पूरी तरह से दीक्षित और शुद्ध उच्चारण में निपुण होते हैं। पूर्ण शास्त्रीय विधि-विधान: संकल्प से लेकर, शिव परिवार पूजन, महामृत्युंजय मंत्र का दशांश हवन, तर्पण, मार्जन और ब्राह्मण भोजन तक की पूरी प्रक्रिया शास्त्रों के नियमों के अनुसार पूरी की जाती है। पारदर्शिता और सात्विकता - पूजा में उपयोग होने वाली सामग्री की शुद्धता से लेकर पंडितों के बैठने के आसन और दिशा (उत्तर या पूर्व मुख) का विशेष ध्यान रखा जाता है। घर बैठे प्रामाणिक अनुष्ठान - यदि आप किसी कारणवश स्वयं उपस्थित नहीं हो पा रहे हैं, तो पूजा सारथी आपके नाम और गोत्र के साथ लाइव या डिजिटल माध्यम से भी इस अनुष्ठान को उतनी ही पवित्रता से संपन्न कराता है। तो आइए हम इसका लाभ उठाएं और आज ही यह अनुष्ठान बुक करें।


दुर्गा सप्तशती को 13 अध्यायों में विभाजित किया गया है, जो मुख्य रूप से तीन चरित्रों (भागों) में बंटे हुए हैं। ये तीनों भाग माँ के तीन स्वरूपों (महाकाली, महालक्ष्मी और महासरस्वती) को समर्पित हैं। प्रथम चरित्र (प्रथम अध्याय) प्रमुख देवी - महाकाली कथा - इसमें भगवान विष्णु के कान के मैल से उत्पन्न मधु और कैटभ नाम के राक्षसों के वध की कथा है। यह तामसी शक्तियों पर विजय का प्रतीक है। मध्यम चरित्र (दूसरा, तीसरा और चौथा अध्याय) प्रमुख देवी - महालक्ष्मी कथा - इसमें महिषासुर नाम के भयानक राक्षस और उसकी सेना के वध का वर्णन है। देवताओं के तेज से माँ दुर्गा का प्राकट्य इसी भाग में होता है। यह राजसी शक्तियों के संतुलन का प्रतीक है। उत्तम चरित्र (पाँचवें से तेरहवें अध्याय तक) प्रमुख देवी - महासरस्वती कथा - इसमें शुम्भ-निशुम्भ, चण्ड-मुण्ड और रक्तबीज जैसे असुरों के संहार की कथा है। यह सात्विक ज्ञान द्वारा अज्ञानता के नाश का प्रतीक है। 🛠️ पाठ की सही विधि (How to Recite) दुर्गा सप्तशती का पूरा लाभ उठाने के लिए इसे एक व्यवस्थित क्रम में पढ़ा जाता है। कवच, अर्गला और कीलक स्तोत्र - पाठ शुरू करने से पहले शरीर और मन को सुरक्षित करने के लिए इनका पाठ अनिवार्य है। नवाण मंत्र का जाप - "ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे" मंत्र का जाप। मुख्य पाठ - १३ अध्यायों का पाठ (सुविधा अनुसार इसे 9 दिनों में बांटकर भी किया जाता है, क्षमा प्रार्थना - पाठ के अंत में अनजाने में हुई गलतियों के लिए माँ से क्षमा याचना की जाती है। 🤝 पूजा सारथी को ही क्यों चुनें? विद्वान और प्रामाणिक आचार्य - हमारे सभी पंडित जी शास्त्रों के ज्ञाता हैं, जो 'ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे' (नवाण मंत्र) के शुद्ध संपुट और सही उच्चारण के साथ पाठ संपन्न करते हैं। पूर्ण पारदर्शी व्यवस्था - पूजन सामग्री की शुद्धता से लेकर शुभ मुहूर्त चयन तक, हर जिम्मेदारी पूजा सारथी की होती है। सच्ची श्रद्धा और नियम - पाठ के दौरान शास्त्रों में बताए गए सभी नियमों (जैसे क्षमा प्रार्थना और आरती) का पूरी निष्ठा से पालन किया जाता है। आज ही अपना अनुष्ठान बुक करें! अपने घर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार करने और माँ जगदम्बा का आशीर्वाद पाने के लिए आज ही हमसे संपर्क करें।


संतान गोपाल सहस्रनाम (जिसे 'गोपाल सहस्रनाम' भी कहा जाता है) सनातन धर्म और विशेषकर वैष्णव परंपरा में एक अत्यंत चमत्कारी और प्रभावशाली स्तोत्र है। यह मुख्य रूप से भगवान श्रीकृष्ण के बाल-रूप (लड्डू गोपाल) को समर्पित है। संवाद: यह दिव्य स्तोत्र भगवान शिव ने माता पार्वती को सुनाया था। जब माता पार्वती ने संसार के कल्याण और विशेषकर वंश वृद्धि (संतान प्राप्ति) के लिए सबसे अचूक उपाय पूछा, तब महादेव ने उन्हें श्रीकृष्ण के इन १००० नामों की महिमा बताई थी। 🎯 मुख्य उद्देश्य और महत्व वैसे तो भगवान के नामों का जप मोक्ष और भक्ति देता है, लेकिन इस सहस्रनाम का एक विशेष अनुष्ठानिक महत्व है। संतान सुख की प्राप्ति - जिन दंपत्तियों को विवाह के कई वर्षों बाद भी संतान का सुख नहीं मिला है, या जिन्हें बार-बार गर्भपात (Miscarriage) जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है, उनके लिए यह पाठ एक अचूक दिव्य औषधि माना गया है। योग्य और संस्कारी संतान - यह केवल संतान देने वाला नहीं, बल्कि भगवान श्रीकृष्ण जैसे गुणी, बुद्धिमान, दीर्घायु और तेजस्वी पुत्र/पुत्री की प्राप्ति का मार्ग प्रशस्त करता है। गर्भावस्था में सुरक्षा - गर्भवती महिलाओं द्वारा इसका श्रवण करने से गर्भ में पल रहे शिशु को सकारात्मक ऊर्जा मिलती है और प्रसव (Delivery) सुरक्षित होता है। वैज्ञानिक और आध्यात्मिक दृष्टिकोण - इस सहस्रनाम के मंत्रों की ध्वनियां घर के वातावरण से नकारात्मक तरंगों (Negative Vibrations) को पूरी तरह समाप्त कर देती हैं। इससे तनाव दूर होता है, जो चिकित्सा विज्ञान के अनुसार भी गर्भधारण (Conception) के लिए सबसे ज़रूरी स्थिति है।


🧡 श्री हनुमान चालीसा महा-अनुष्ठान - जब संकट बड़े हों, तो संकटमोचन को पुकारिए... "कवन सो काज कठिन जग माहीं, जो नहीं होइ तात तुम्ह पाहीं।" जीवन के सफ़र में कभी-कभी ऐसा मोड़ आता है जब चारों तरफ निराशा का अंधकार छा जाता है। रास्ते बंद नजर आने लगते हैं, मन थक जाता है और अपने भी साथ छोड़ देते हैं। ऐसे समय में, कलियुग के साक्षात जागृत देव, करुणा के सागर श्री हनुमान जी ही हमारी आखिरी उम्मीद बनते हैं। वे केवल एक देवता नहीं हैं; वे एक ऐसे रक्षक हैं जो अपने भक्त की एक पुकार पर दौड़े चले आते हैं। हनुमान चालीसा की एक-एक चौपाई में वह दिव्य शक्ति है जो सोई हुई किस्मत को जगा सकती है। जब "पूजा सारथी" के परम पवित्र, वेदमूर्ति ब्राह्मण आपके और आपके परिवार के कल्याण के लिए एक सुर में 108 से लेकर 1100 पाठ का महा-अनुष्ठान करते हैं, तो उस स्थान का कण-कण बजरंगबली की चेतना और दिव्य ऊर्जा से गूंज उठता है। 🌸 भक्ति और समर्पण का साक्षात स्वरूप (The Essence of Devotion) यह अनुष्ठान केवल मंत्रों का जाप नहीं, बल्कि आपके हृदय की पुकार को हनुमान जी के चरणों तक पहुँचाने का एक सेतु है। ✨ अटूट विश्वास का संकल्प - जब आचार्य जी हाथ में जल लेकर आपके आंसू, आपकी चिंताएं और आपकी मनोकामनाएं बाबा बजरंगबली को सौंपते हैं, तो उसी क्षण से आपके संकटों का भार हनुमान जी अपने कंधों पर ले लेते हैं। 🌹 श्रद्धा का चोला और प्रिय भोग - प्रभु को अत्यंत प्रिय सिंदूरी चोला, पवित्र जनेऊ और तुलसी दल के साथ जब उनके प्रिय लड्डू अर्पित किए जाते हैं, तो भक्त के भाव देखकर पवनपुत्र का हृदय द्रवित हो उठता है। 🔥 गूंजती चौपाइयां और यज्ञ की आहुति: ११ या अधिक ब्राह्मणों के मुख से जब सामूहिक रूप से चालीसा का पाठ होता है, तो घर की नकारात्मकता और अशांति भस्म हो जाती है। अंत में जलने वाली पावन अग्नि की लौ आपके जीवन के सारे कष्टों को अपने भीतर समेट लेती है। 📱 अपनी श्रद्धा अनुसार चुनें अपना पैकेज (Choose Your Plan) 🚩 108 पाठ अनुष्ठान1 से 3 ब्राह्मणमानसिक शांति, सुख-समृद्धि और दैनिक संकटों के निवारण हेतु। 🚩 251 पाठ अनुष्ठान3 से 5 ब्राह्मणव्यापार में वृद्धि, रुके हुए काम बनाने और स्वास्थ्य लाभ हेतु। 🚩 501 पाठ अनुष्ठान5 से 7 ब्राह्मणबड़े संकटों से मुक्ति, कुंडली के भारी ग्रह दोषों की शांति हेतु। 🚩 1100 महा-अनुष्ठान11 या अधिक ब्राह्मणअसाध्य रोगों से रक्षा, मुकदमों में विजय और कुल के कल्याण हेतु। 🔱 हमारे वैदिक ब्राह्मणों द्वारा अनुष्ठान के मुख्य चरण (Process) 📌 सकाम संकल्प: अनुष्ठान की शुरुआत में आचार्य जी आपके नाम, गोत्र और विशिष्ट मनोकामना का संकल्प लेते हैं। 🛡️ हनुमान जी का आह्वान एवं षोडशोपचार पूजन: बजरंगबली को सिंदूर, चोला, जनेऊ, फल और उनके प्रिय बूंदी के लड्डू/चूरमे का भोग लगाकर पूजन किया जाता है। 📿 सामूहिक पाठ संख्या की पूर्णता: हमारे अनुभवी विद्वान ब्राह्मण एक साथ बैठकर पूरी शुद्धता के साथ आपके द्वारा चुनी गई संख्या (108 से 1100 पाठ) को पूर्ण करते हैं। 🔥 दिव्य बजरंग बाण एवं हवन: पाठ की पूर्णता पर संकटों के समूल नाश के लिए विशेष आहुतियों के साथ हवन संपन्न किया जाता है। 🥺 हृदय से एक बात: "हनुमान जी बहुत भोले हैं, वे चतुरता से नहीं, केवल शुद्ध भाव से रीझते हैं। 'पूजा सारथी' के माध्यम से हमारे ब्राह्मण पूरी सात्विकता और अनन्य भक्ति के साथ आपकी ओर से अर्जी लगाएंगे। आप बस विश्वास रखिए, क्योंकि जिनके रक्षक बजरंगबली हों, उनका अमंगल कभी हो ही नहीं सकता।" अपनी आँखें बंद करें, अपनी चिंताएं प्रभु को सौंपें और आज ही पूजा सारथी ऐप पर हनुमान चालीसा अनुष्ठान का संकल्प लें। जय श्री राम, जय हनुमान!"


हरि ॐ। पूजा सारथी ऐप के इस विशेष खंड में आपका स्वागत है। "हिंदू धर्म और सनातन संस्कृति में किसी प्रियजन के देहावसान के बाद गरुड़ पुराण के श्रवण का विशेष विधान है। मान्यता है कि इसे सुनने से जीवात्मा को यमलोक के मार्ग में संबल मिलता है और उसे मोक्ष की प्राप्ति होती है। लेकिन इसके साथ ही, यह अद्भुत ग्रंथ जीवित मनुष्यों को भी धर्म, नीति, सदाचार और सही कर्म करने की प्रेरणा देता है। पूजा सारथी ऐप पर हमने इस पावन पुराण के पाठ को बहुत ही सरल, शुद्ध और भक्तिमय रूप में संकलित किया है। अनुभवी विद्वानों और सुरीले भजनों के मेल के साथ यह पाठ शोक संतप्त परिवार के मन को असीम शांति और संबल प्रदान करेगा।" शुद्ध एवं प्रामाणिक वाचन - वैदिक नियमों और शुद्ध उच्चारण के साथ गरुड़ पुराण का सरल भाषा में पाठ। वैराग्य एवं सांत्वनापूर्ण भजन - पाठ के बीच-बीच में मन को शांत करने वाले सुरीले संकीर्तन और भजन। अध्याय-अनुसार वर्गीकरण (Chapter-wise) - आत्मा के सफर, कर्मों के फल और मोक्ष के मार्गों का स्पष्ट विभाजन, ताकि आप अपनी सुविधा के अनुसार सुन सकें। कहीं भी, कभी भी श्रवण - घर पर सूतक या शोक की घड़ी में, परिवार के सभी सदस्य एक साथ बैठकर सीधे माध्यम से इसे सुन सकते हैं। शोक की घड़ी में मन को दे शांति — सुनिए गरुड़ पुराण पाठ, "कर्म, मृत्यु और मोक्ष का संपूर्ण सत्य। आज ही शुरू करें गरुड़ पुराण का प्रामाणिक पाठ।"


"गायत्री छन्दसामातैः" अर्थात गायत्री मंत्र को सभी वेदों की माता (वेदमाता) माना गया है। यह मंत्र साक्षात भगवान सूर्य (सविता देव) की ऊर्जा का प्रतीक है। जब जीवन में निर्णय लेने की क्षमता कमजोर होने लगे, मानसिक तनाव बढ़े या कार्यों में लगातार विघ्न आएँ, तब गायत्री अनुष्ठान ही एक ऐसा अमोघ उपाय है जो बुद्धि को प्रखर कर भाग्य के द्वार खोलता है। पूजा सारथी ऐप के माध्यम से आप घर बैठे देश के अत्यंत योग्य, कर्मकांडी और वेद-पाठी ब्राह्मणों द्वारा इस महा-अनुष्ठान को संपन्न करवा सकते हैं। 🤝 पूजा सारथी ही क्यों चुनें? 100% प्रामाणिक और वैदिक ब्राह्मण: हमारे पास केवल वही ब्राह्मण सूचीबद्ध हैं जिन्हें शास्त्रों का गहरा ज्ञान और वर्षों का अनुभव है। पारदर्शिता और शुचिता - पूजा हमारे द्वारा निश्चित स्थान पर लाइव वीडियो कॉलिंग या अपने द्वारा निश्चित स्थान पर उचित दक्षिणा - बिना किसी अतिरिक्त या छुपे हुए शुल्क के, शास्त्रों के अनुसार तय और उचित दक्षिणा। निश्चित संख्या में मंत्र जप यजमान की इच्छानुसार तय की गई संख्या का जप ब्राह्मणों द्वारा शुरू किया जाता है 21,000 जप - छोटे संकटों के निवारण या मानसिक शांति के लिए। 51,000 जप - गंभीर पारिवारिक संकट या व्यापारिक मंदी को दूर करने के लिए। 1,25,000 (सवा लाख) महा-अनुष्ठान - असाध्य रोगों से मुक्ति, कुंडली के महादोषों के निवारण और सर्वकल्याण के लिए (यह सर्वोत्तम माना जाता है)। "बुद्धि को सन्मार्ग की ओर प्रेरित करने वाले इस महामंत्र के अनुष्ठान से अपने जीवन का कायाकल्प करें। माँ गायत्री की असीम कृपा पाने के लिए आज ही अपना संकल्प बुक करें।"


1-दिवसीय आध्यात्मिक साधना माँ लक्ष्मी की कृपा प्राप्ति के लिए। धन, समृद्धि और व्यापार वृद्धि हेतु। वैदिक वास्तुकला और शास्त्रों में 'श्री सूक्तम' (Sri Suktam) को देवी महालक्ष्मी की आराधना के लिए सबसे शक्तिशाली और सिद्ध मंत्र माना गया है। ऋग्वेद से लिया गया यह सूक्त साक्षात 'श्री' यानी ऐश्वर्य, सौंदर्य और समृद्धि की अधिष्ठात्री देवी लक्ष्मी को समर्पित है। जब जीवन में कड़ा परिश्रम करने के बाद भी सफलता नहीं मिलती, धन टिकता नहीं, या कर्ज का बोझ बढ़ता जाता है, तब श्री सूक्तम का अनुष्ठान एक दिव्य कवच की तरह काम करता है। पूजा सारथी ऐप के माध्यम से आप इस पवित्र अनुष्ठान को पूर्ण वैदिक रीति-रिवाज और शुद्धता के साथ अपने घर या ऑनलाइन संपन्न करवा सकते हैं। 🔱 अनुष्ठान का महत्व और आध्यात्मिक पक्ष शास्त्रों के अनुसार, श्री सूक्तम के 16 श्लोकों में ब्रह्मांड की समस्त समृद्धि का रहस्य छुपा है। इसके नियमित पाठ या विशेष अनुष्ठान से केवल धन ही नहीं, बल्कि 'अष्ट लक्ष्मी' (आदि लक्ष्मी, धन लक्ष्मी, धान्य लक्ष्मी, गज लक्ष्मी, संतान लक्ष्मी, वीर लक्ष्मी, जय लक्ष्मी और विद्या लक्ष्मी) की कृपा प्राप्त होती है। यह अनुष्ठान आपके जीवन से 'अलक्ष्मी' (दरिद्रता, कलह और नकारात्मकता) को हमेशा के लिए दूर कर देता है। 🛠️ पूजा सारथी ऐप की विशेषताएं (Why Choose Puja Sarthi?) प्रमाणित और अनुभवी पंडित - हमारी टीम में केवल वही आचार्य शामिल हैं जिन्हें वेदों और कर्मकांड का गहन ज्ञान है। शुद्ध और प्रामाणिक सामग्री - यदि आप ऑफलाइन पूजा चुनते हैं, तो गंगाजल से लेकर कमल गट्टे तक, सभी सामग्रियां गंगा किनारे या प्रामाणिक स्रोतों से लाई जाती हैं। लाइव वीडियो का विकल्प (Online Puja) - यदि आप व्यस्त हैं, तो दुनिया के किसी भी कोने से ऐप के जरिए लाइव जुड़कर इस अनुष्ठान का हिस्सा बन सकते हैं। पंडित जी स्क्रीन पर आपके नाम से संकल्प करवाएंगे। पारदर्शी सेवा - कोई छुपा हुआ शुल्क नहीं। पूजा की पूरी सूची और समय आपको पहले ही ऐप पर दे दिया जाता है। अभी अपनी सुविधानुसार स्लॉट बुक करें और माँ लक्ष्मी का आशीर्वाद पाएं।


वैदिक ज्योतिष और शास्त्रों में सूर्य देव को "नक्षत्रणामधिपतिः" यानी समस्त ग्रहों का राजा और जगत की आत्मा कहा गया है। सूर्य केवल एक तारा या ग्रह नहीं हैं, बल्कि वे साक्षात नारायण हैं जो संपूर्ण सृष्टि को ऊर्जा, जीवन, और चेतना प्रदान करते हैं। कुंडली में सूर्य का मजबूत होना व्यक्ति को राजसिक जीवन , प्रशासनिक सर्वोच्चता और अदम्य आत्मिक बल प्रदान करता है। वहीं, जब सूर्य राहु-केतु (ग्रहण दोष), शनि की दृष्टि, या नीच राशि में होने के कारण पीड़ित होते हैं, तो व्यक्ति की योग्यता छिप जाती है। सूर्य ग्रह दोष निवारण अनुष्ठान एक ऐसी वैदिक प्रक्रिया है जो सूर्य देव के नकारात्मक प्रभावों को शांत कर उनकी दिव्य, तेजवान और कल्याणकारी ऊर्जा को आपके जीवन में सक्रिय करती है। 🎯 किन जातकों को यह अनुष्ठान अनिवार्य रूप से कराना चाहिए? जिनकी कुंडली में सूर्य राहु या केतु के साथ बैठकर 'सूर्य ग्रहण दोष' बना रहे हों। यदि सूर्य देव तुला राशि (नीच राशि) में स्थित हों या शत्रु ग्रहों (शनि, राहु) से दृष्ट हों। यदि आप राजनीति, समाज सेवा या प्रशासनिक सेवाओं में शीर्ष पर पहुंचना चाहते हैं। यदि आपके पिता के साथ वैचारिक मतभेद रहते हों या पैतृक संपत्ति में विवाद चल रहा हो। बिना वजह बदनामी (अपयश) का सामना करना पड़ रहा हो। अपनी जन्म कुंडली के अनुसार ग्रहों की शुभता बढ़ाने एवं अशुभता को दूर करने हेतु नवग्रह शांति जाप या पाठ। वैदिक या तांत्रिक मंत्र द्वारा ग्रह संख्या के मंत्र का चार गुना जाप तथा ग्रहों की समिधा द्वारा हवन-पूर्णाहुति एवं उसका दान। "उदयती सूर्य की भांति अपने जीवन के अंधकार को मिटाएं। आज ही पूजा सारथी के साथ जुड़कर सूर्य देव की दिव्य कृपा प्राप्त करें।"


शतचंडी महायज्ञ - ब्रह्मांडीय ऊर्जा और आदि-शक्ति की दिव्य चेतना का अवतरण जब लौकिक उपाय थक जाते हैं और पुरुषार्थ की सीमाएं समाप्त होने लगती हैं, तब आदि-शक्ति, जगतजननी मां जगदम्बा की अलौकिक चेतना का आश्रय ही एकमात्र मार्ग बचता है। शतचंडी महायज्ञ सनातन धर्म का वह परम पावन और आदि-अनंत अनुष्ठान है, जो न केवल मनुष्य के प्रारब्ध (भाग्य) को बदलने की सामर्थ्य रखता है, बल्कि पूरे वातावरण को दैवीय सकारात्मकता से ऊर्जस्वित कर देता है। 'शत्' अर्थात सौ और 'चंडी' अर्थात मां दुर्गा का वह प्रचंड रूप जो अधर्म, अंधकार और संकटों का मर्दन करता है। श्री दुर्गा सप्तशती के १०० संपूर्ण पाठों के महा-संपुट और सवा लाख नवार्ण मंत्रों की आहुति से प्रकट होने वाली यह यज्ञीय ऊर्जा साक्षात ईश्वरीय हस्तक्षेप है। 🛠️ शतचंडी महायज्ञ की अलौकिक एवं कल्पवृक्ष विधि यह यज्ञ अत्यंत कड़े नियमों, शुद्धता और सर्वोच्च वैदिक ऋचाओं के साथ कई दिनों (आमतौर पर ५ से ९ दिन) तक अनवरत चलता है: ब्रह्मांडीय आह्वान - देवी भागवत के अनुसार, सबसे पहले नवग्रह, दशदिक्पाल, योगिनियों और चौंसठ देवियों का आह्वान कर कलश में उन्हें प्रतिष्ठित किया जाता है। श्री दुर्गा सप्तशती शतपाठ - परम विद्वान, ब्रह्मचारी आचार्यों द्वारा संपुटयुक्त, कीलक, अर्गला और कवच के साथ दुर्गा सप्तशती के १०० अत्यंत शुद्ध पाठ किए जाते हैं। प्रत्येक पाठ मां के एक नए स्वरूप को जाग्रत करता है। नवार्ण मंत्र अनुष्ठान - 'ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे'—इस महामंत्र के सवा लाख जपों से यजमान के मूलाधार से लेकर सहस्रार चक्र तक की ऊर्जा शुद्ध होती है। दिव्य महा-हवन - यज्ञ के अंतिम चरण में पलाश, कमल गट्टा, गूलर, शुद्ध गाय के घी, बेलपत्र और औषधियों से सुसज्जित हवन कुंड में प्रचंड आहुतियां दी जाती हैं, जिससे दिव्य अग्नि प्रज्वलित होती है। कुमारी और बटुक पूजन - नौ वर्ष से कम आयु की नौ कन्याओं को साक्षात दुर्गा का स्वरूप मानकर उनके चरण पखारे जाते हैं, उन्हें सात्विक भोजन कराया जाता है और उपहार देकर उनका आशीर्वाद लिया जाता है। पूजा सारथी का दिव्य संकल्प "यस्याः प्रभावाद् अतुलं भगवानन्तोऽपि रूपमस्मद्... " जिस प्रकार संपूर्ण जगत मां की इच्छा मात्र से संचालित है, उसी प्रकार पूजा सारथी आपके लिए इस परम दुर्लभ महायज्ञ को अत्यंत सुलभ और प्रामाणिक बनाता है। हमारे साथ जुड़े काशी, प्रयागराज और वैदिक पीठों के सिद्ध पुरोहित इस महायज्ञ को आपके नाम, गोत्र और विशिष्ट संकल्प के साथ संपन्न करते हैं। यदि आप अपने जीवन को एक नई दिव्य दिशा देना चाहते हैं, कुल की रक्षा चाहते हैं और अपनी आने वाली पीढ़ियों के लिए सुख-समृद्धि का मार्ग निष्कंटक करना चाहते हैं, तो इस अलौकिक शतचंडी महायज्ञ का हिस्सा बनें। मां भवानी आपकी हर मनोकामना पूर्ण करें।


कालसर्प दोष नाग गायत्री अनुष्ठान - भाग्य के अवरोधों का अंत और राजयोग का उदय अदृश्य बंधनों से मुक्ति, जीवन में प्रगति की नई शुरुआत! ज्योतिष शास्त्र में 'कालसर्प दोष' को एक ऐसा योग माना गया है जो व्यक्ति के जीवन को संघर्षमय बना देता है। जब कुंडली में राहु और केतु के बीच सभी सात ग्रह (सूर्य, चंद्र, मंगल, बुध, गुरु, शुक्र, शनि) आ जाते हैं, तो कालसर्प दोष का निर्माण होता है। यह दोष जातक की कुंडली के अच्छे और शुभ राजयोगों के फलों को भी बांध देता है, जिससे व्यक्ति को अपनी योग्यता के अनुसार फल नहीं मिल पाता। पूजा सारथी का यह विशेष नाग गायत्री अनुष्ठान राहु-केतु की क्रूरता को शांत करने और नवनाग देवताओं की असीम कृपा प्राप्त करने का सबसे अचूक और प्रामाणिक वैदिक उपाय है। यह अनुष्ठान आपके लिए क्यों अनिवार्य है? (लक्षण और समस्याएं) यदि आप अपने जीवन में निम्नलिखित समस्याओं का सामना कर रहे हैं, तो यह अनुष्ठान आपके लिए अत्यंत आवश्यक है: ऐन वक्त पर सफलता का रुकना - लगातार कड़ी मेहनत और योग्यता होने के बावजूद प्रमोशन रुक जाना, नौकरी छूटना या व्यापार में अचानक भारी घाटा होना। मानसिक तनाव और डरावने सपने - सोते समय अचानक डर जाना, अनिद्रा, डिप्रेशन रहना या सपनों में बार-बार सांप दिखाई देना या पानी में डूबने का अहसास होना। विवाह और संतान सुख में बाधा - विवाह योग्य उम्र होने पर भी रिश्ता तय न हो पाना, विवाहित जीवन में लगातार कलह रहना, या संतान प्राप्ति में चिकित्सकीय बाधाएं आना। अज्ञात भय और शारीरिक कष्ट - स्वास्थ्य का अक्सर खराब रहना, डॉक्टरों द्वारा बीमारी पकड़ में न आना और हमेशा किसी अनहोनी का डर सताना। क्यों खास है पूजा सारथी ऐप की यह सर्विस? 100% प्रामाणिक वैदिक आचार्य: हमारे सभी पंडित जी वेदों और ज्योतिष शास्त्र के ज्ञाता हैं, जो मंत्रों का शुद्ध और सस्वर उच्चारण करते हैं। स्थान का विकल्प: आप इस अनुष्ठान को अपनी सुविधानुसार अपने घर पर, किसी प्राचीन शिव मंदिर में या पवित्र नदी तट प्रतिनिधि विद्वानों द्वारा ऑनलाइन ऑफलाइन करा सकते हैं। पूर्ण सामग्री प्रबंधन - ऑल-इनक्लूसिव पैकेज चुनने पर धातु के विशेष नाग-नागिन के जोड़े, काले तिल, कुशा, और हवन समिधा सहित पूजा की शत-प्रतिशत शुद्ध सामग्री पंडित जी स्वयं लेकर आते हैं। [ आज ही अपना शुभ मुहूर्त चुनें और कालसर्प दोष नाग गायत्री अनुष्ठान बुक करें ]


🔱 माँ पीताम्बरा बगलामुखी अनुष्ठान - घोर संकटों से मुक्ति और प्रचंड शत्रु स्तंभन 21,000 मंत्र जप अनुष्ठान (लघु अनुष्ठान) - तात्कालिक संकट और मानसिक शांति के लिए 51,000 मंत्र जप अनुष्ठान (मध्यम अनुष्ठान) - तीव्र संकट और कानूनी विवादों के लिए 1,25,000 मंत्र जप अनुष्ठान (महा-अनुष्ठान / सवा लाख जप) - असाध्य संकट और पूर्ण विजय के लिए सनातन तंत्र और वैदिक परंपरा में माँ बगलामुखी (जिन्हें माई पीताम्बरा भी कहा जाता है) को आठवीं महाविद्या के रूप में पूजा जाता है। यह अनुष्ठान संसार का सबसे शक्तिशाली सुरक्षा कवच माना जाता है। माँ बगलामुखी की साधना का मुख्य उद्देश्य 'स्तंभन' है—अर्थात शत्रुओं की कुदृष्टि, झूठे मुकदमों, गुप्त विरोधियों की चालों और आपके विरुद्ध उठने वाली हर नकारात्मक शक्ति को वहीं की वहीं फ्रीज (Stambhan) कर देना। यदि आप लंबे समय से किसी कानूनी विवाद (Court Case), राजनीतिक गतिरोध, व्यापारिक प्रतिद्वंद्विता (Business Rivalry), या किसी अज्ञात भय और तंत्र-बाधा से जूझ रहे हैं, तो यह अनुष्ठान आपके जीवन में अभूतपूर्व बदलाव और मानसिक शांति ला सकता है। 'पूजा सारथी' ऐप के माध्यम से आप इस अत्यंत गोपनीय, नियमबद्ध और पवित्र अनुष्ठान को पूर्ण तांत्रिक-वैदिक शुद्धता और विशेष पीत नियमों (पीले रंग के विधान) के साथ संपन्न कर सकते हैं। ✨ इस अनुष्ठान का धार्मिक और व्यावहारिक महत्व- शत्रु और मुकदमों में विजय - यदि आपके ऊपर कोई झूठा आरोप या अदालती मुकदमा चल रहा है, तो माँ बगलामुखी की कृपा से विरोधियों की वाणी और बुद्धि का स्तंभन होता है, जिससे सत्य की विजय का मार्ग प्रशस्त होता है। व्यापारिक और राजनीतिक सुरक्षा - कॉर्पोरेट जगत या राजनीति में छिपे हुए दुश्मनों और ईर्ष्या करने वालों के बुरे प्रयासों को निष्प्रभावी करने के लिए यह अनुष्ठान अचूक माना जाता है। नकारात्मक ऊर्जा और नजर दोष से मुक्ति: यह अनुष्ठान आपके और आपके परिवार के चारों ओर एक ऐसा सुरक्षा चक्र (Energy Shield) बनाता है जिसे कोई भी बुरी शक्ति या तंत्र-मंत्र भेद नहीं सकता। 📋 मुख्य अनुष्ठान और रस्में (Rituals Involved) - पीले वस्त्र और पीत आसन की व्यवस्था, हल्दी के गणेश जी का पूजन, पीत कलश स्थापना, माँ बगलामुखी यंत्र का हल्दी व पीले फूलों से विशेष अभिषेक, माँ बगलामुखी स्तोत्र/कवच का पाठ, हल्दी की माला से मंत्र जप, और विशेष पीली सामग्रियों (पीली सरसों, हल्दी की गांठें) से किया जाने वाला दशांश हवन। 🌟 पूजा सारथी ऐप ही क्यों चुनें? दीक्षित और सिद्ध आचार्य - माँ बगलामुखी की पूजा अत्यंत संवेदनशील होती है और इसमें मंत्रों व नियमों की शुद्धता अनिवार्य है। हमारे ऐप से जुड़े पंडित जी इस महाविद्या के नियमों और गुप्त साधना पद्धतियों में पूरी तरह दीक्षित और पारंगत हैं। नियमों का कड़ा पालन - इस अनुष्ठान में केवल पीले रंग की सामग्रियों, पीले वस्त्रों और विशेष दिशाओं का ध्यान रखा जाता है। हमारी टीम शुद्ध और उत्तम श्रेणी की पीत-सामग्री की व्यवस्था स्वयं सुनिश्चित करती है। पूर्ण गोपनीयता और संकल्प - आपके संकटों के निवारण के लिए आपके नाम और गोत्र से विशेष तांत्रिक-वैदिक संकल्प कराया जाता है, जिसकी गोपनीयता पूरी तरह सुरक्षित रखी जाती है। विपत्तियों को हराएं, अजेय सुरक्षा पाएं। आज ही अपने संकटों के पूर्ण निवारण और विजय के लिए माँ पीताम्बरा बगलामुखी अनुष्ठान बुक करें!


चन्द्र ग्रह दोष क्या है? (कारण और प्रकार) वैदिक ज्योतिष के अनुसार, चंद्रमा को 'मनसो जातः' यानी मन का कारक माना गया है। जब चंद्रमा पर पापी या क्रूर ग्रहों का प्रभाव होता है, तो चन्द्र दोष का निर्माण होता है। इसके मुख्य रूप निम्नलिखित हैं। ग्रहण दोष - जब कुंडली में चंद्रमा का संयोग राहु या केतु के साथ हो जाता है, तो व्यक्ति का मन हमेशा भ्रमित और भयभीत रहता है। विष दोष - जब चंद्रमा पर शनि की दृष्टि हो या वे साथ बैठे हों, तो व्यक्ति घोर निराशा और डिप्रेशन का शिकार हो जाता है। केमद्रुम दोष: यदि चंद्रमा के आगे और पीछे के भावों में कोई ग्रह न हो, तो व्यक्ति अपनों के बीच रहकर भी खुद को अकेला पाता है। क्षीण चंद्रमा - अमावस्या या उसके आस-पास का कमजोर चंद्रमा व्यक्ति को मानसिक रूप से कमजोर बनाता है। दोष के मुख्य लक्षण (आपको इस अनुष्ठान की आवश्यकता क्यों है?) यदि आप या आपके परिवार का कोई सदस्य नीचे दी गई समस्याओं से जूझ रहा है, तो यह चन्द्र दोष का संकेत हो सकता है। मानसिक और भावनात्मक कष्ट - बिना किसी ठोस वजह के घबराहट (Anxiety), लगातार उदासी, नकारात्मक विचार और मूड स्विंग्स होना। मां को कष्ट - माता का स्वास्थ्य लगातार खराब रहना या माता के साथ वैचारिक मतभेद होना। नींद की समस्या - अनिद्रा (Insomnia), रात को अचानक डर कर उठ जाना या डरावने सपने आना। निर्णय न ले पाना - एकाग्रता की भारी कमी, मन का लगातार भटकना और किसी एक फैसले पर न टिक पाना। शारीरिक कष्ट - छाती में इंफेक्शन, फेफड़ों की बीमारी, कफ, सर्दी-खांसी और जल से जनित रोग। चन्द्र ग्रह दोष निवारण अनुष्ठान केवल एक अनुष्ठान नहीं, बल्कि आपके जीवन के अंधकार को पूर्णिमा की शीतलता और प्रकाश में बदलने का एक दिव्य मार्ग है। पूरी श्रद्धा और विश्वास के साथ किया गया यह प्रयास आपके मन को आनंद से भर देता है। [अभी बुक करें] — चंद्र देव के आशीर्वाद से अपने मन को अशांति से आनंद की ओर ले जाएं।


अमंगल का अंत, मंगल का प्रारंभ! नवग्रहों में 'सेनापति' और 'अंगारक' माने जाने वाले मंगल देव साहस, ऊर्जा, भूमि और रक्त के कारक हैं। जब कुंडली में मंगल देव कमजोर, नीच के होते हैं या 'मांगलिक दोष' का निर्माण करते हैं, तो व्यक्ति का जीवन अनियंत्रित क्रोध, विवादों और असफलताओं से घिर जाता है। पूजा सारथी का यह विशेष वैदिक अनुष्ठान आपके जीवन में मंगल जनित सभी दोषों को शांत कर नकारात्मक ऊर्जा को अदम्य साहस और सकारात्मकता में बदलने के लिए तैयार किया गया है। यह अनुष्ठान आपके लिए क्यों अनिवार्य है? (लक्षण और समस्याएं) यदि आप अपने जीवन में नीचे दी गई समस्याओं का सामना कर रहे हैं, तो यह अनुष्ठान आपके लिए एक अचूक आध्यात्मिक समाधान है। अत्यधिक क्रोध और मानसिक तनाव: बिना बात के चिड़चिड़ापन, अपनों से रिश्ते खराब होना या स्वभाव में आक्रामकता आना। कर्ज और आर्थिक तंगी (ऋण संकट) - लगातार मेहनत के बाद भी कर्ज का बढ़ता जाना और धन की कमी। जमीन-जायदाद के विवाद - प्रॉपर्टी, भूमि या मकान को लेकर कोर्ट-कचहरी के चक्कर काटना या भाइयों से विवाद होना। विवाह में बाधा (मांगलिक दोष) - विवाह योग्य उम्र होने पर भी शादी तय न होना या वैवाहिक जीवन में रोज कलह होना। रक्त और स्वास्थ्य विकार - बार-बार दुर्घटनाएं होना, चोट लगना या रक्त से संबंधित बीमारियां होना। क्यों खास है पूजा सारथी ऐप की यह सर्विस? 100% प्रामाणिक वैदिक ब्राह्मण - हमारे सभी पंडित जी शास्त्र-सम्मत और शुद्ध मंत्रोच्चार में निपुण हैं। पूर्ण पारदर्शी व्यवस्था - संकल्प से लेकर पूर्णाहुति तक की हर विधि आपकी आंखों के सामने (आपके घर पर या लाइव वीडियो द्वारा) संपन्न होती है। कस्टमाइज्ड संकल्प - आपकी विशिष्ट समस्या (जैसे कर्ज मुक्ति या विवाह बाधा) के अनुसार ही ब्राह्मण द्वारा विशेष संकल्प लिया जाता है। सामग्री की चिंता से मुक्ति - ऑल-इनक्लूसिव (All-inclusive) पैकेज चुनने पर पूजा की सारी शुद्ध सामग्री (लाल कपड़ा, मसूर की दाल, कलावा आदि) पंडित जी स्वयं लेकर आते हैं। [ आज ही अपना शुभ मुहूर्त चुनें और अनुष्ठान बुक करें ]


गंडमूल नक्षत्र - ज्योतिष के 27 नक्षत्रों में से 6 गंडमूल नक्षत्र हैं: अश्विनी, आश्लेषा, मघा, ज्येष्ठा, मूल, और रेवती। दोष का कारण- जब राशि (जैसे मीन) समाप्त हो रही हो और नक्षत्र (जैसे रेवती) भी समाप्त हो रहा हो, तो उस संधि स्थल पर पैदा होने वाले बच्चे को गंडमूल दोष लगता है। प्रभाव- मान्यता है कि गंडमूल मे जन्म लेने वाले बच्चे को स्वास्थ्य, धन, या परिवार से संबंधित चुनौतियो का सामना करना पड सकता है। उपाय और शांति - इन नक्षत्रों मे जन्म लेने वाले बच्चों के लिए 27 दिनो बाद (या जब भी संभव हो) गंडमूल शांति पूजा और हवन किया जाता है, जिससे दोष शांत हो जाता है और जीवन में सकारात्मकता आती है।


क्या आपके नए या वर्तमान घर में प्रवेश करने के बाद से लगातार बीमारियां, आपसी कलह या आर्थिक तंगी बनी हुई है? क्या कड़ी मेहनत के बाद भी घर में बरकत (बचत) नहीं हो रही है? शास्त्रों के अनुसार, भूमि, मकान, दुकान या फैक्टरी का निर्माण करते समय जाने-अनजाने में पंचमहाभूतों (पृथ्वी, जल, अग्नि, वायु और आकाश) के संतुलन में कुछ कमियां रह जाती हैं, जिन्हें वास्तु दोष कहा जाता है। वास्तु दोष होने से उस स्थान पर नकारात्मक ऊर्जा (Negative Energy) का वास हो जाता है, जो वहां रहने वाले सदस्यों की प्रगति को रोक देती है। पूजा सारथी आपके निवास, कार्यालय या व्यापारिक स्थल के लिए लेकर आया है पूर्णतः वैदिक रीति-रिवाज से संपन्न होने वाली विशेष वास्तु शांति पूजा। यह अनुष्ठान अदृश्य दोषों को दूर कर आपके आशियाने को सुख, शांति और अखंड लक्ष्मी का वास प्रदान करता है। महत्व और लाभ दोषों का निवारण- संरचनात्मक परिवर्तनों की आवश्यकता के बिना निर्माण, वास्तुकला या भूमि मे मौजूद दोषों का निवारण करता है। नकारात्मकता दूर करता है: यह स्वास्थ्य और समृद्धि को प्रभावित करने वाली नकारात्मक ऊर्जाओं और वास्तु दोषों को दूर करता है। सामंजस्य और प्रचुरता - सुख, समृद्ध और शांति के लिए आशीर्वाद का आह्वान करता है। प्रकृति का संतुलन- पांच तत्वों (पृथ्वी, जल, अग्नि, वायु, आकाश) और दिशाओं का सम्मान करता है वास्तु शांति कब करे घर में प्रवेश करने से पहले आमतौर पर गृह प्रवेश (नए घर में गृहप्रवेश) से पहले किया जाता है। नवीनीकरण- घर या व्यावसायिक स्थान के बडे पैमाने पर पुनर्निर्माण के बाद।


वैदिक ज्योतिष में बुध ग्रह (Mercury) को ग्रहों का 'राजकुमार' माना गया है। यह हमारी बुद्धि, विवेक, वाणी (Communication), व्यापार (Business), शिक्षा और तर्कशक्ति के नियंत्रक हैं। जब किसी जातक की कुंडली में बुध ग्रह मजबूत होता है, तो वह अपनी कुशाग्र बुद्धि और सटीक निर्णयों से जीवन के हर क्षेत्र में सफलता प्राप्त करता है। इसके विपरीत, यदि बुध देव कमजोर, पीड़ित या नीच राशि में हों, तो व्यक्ति की निर्णय क्षमता प्रभावित होती है और जीवन में कई तरह के उतार-चढ़ाव आने लगते हैं। 'पूजा सारथी' ऐप आपके लिए लेकर आया है बुध ग्रह दोष निवारण अनुष्ठान, जिसके माध्यम से आप घर बैठे हमारे अनुभवी और वैदिक विद्वानों द्वारा इस विशेष पूजा को संपन्न कराकर बुध देव की असीम कृपा प्राप्त कर सकते हैं। बुध दोष के मुख्य लक्षण (Symptoms of Mercury Dosha) यदि आप अपने जीवन में निम्नलिखित समस्याओं का सामना कर रहे हैं, तो यह बुध दोष का संकेत हो सकता है व्यापार में लगातार नुकसान - कड़ी मेहनत के बाद भी बिजनेस का न चलना या अचानक भारी घाटा होना। करियर और शिक्षा में रुकावट - परीक्षा या इंटरव्यू में मनमुताबिक परिणाम न मिलना, एकाग्रता की कमी। संवाद में परेशानी (Communication Gap): अपनी बात को सही तरीके से न रख पाना, हकलाहट या आत्मविश्वास की कमी। वित्तीय संकट - पैसों की तंगी, कर्ज का बढ़ना या अटका हुआ धन वापस न मिलना। स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं - त्वचा (Skin) के रोग, नसों में कमजोरी या अत्यधिक मानसिक तनाव रहना। आज ही बुक करें! अपने जीवन से मानसिक तनाव और आर्थिक मंदी को दूर कर सफलता के द्वार खोलें। आज ही पूजा सारथी ऐप पर 'बुध ग्रह दोष निवारण अनुष्ठान' बुक करें और बुध देव का दिव्य आशीर्वाद प्राप्त करें। "बुधाय बुद्धिप्रदाय च सर्वसौख्यप्रदायिने।।" (बुद्धि और सभी सुखों को देने वाले बुध देव को हमारा नमन है।)


वैदिक ज्योतिष में बृहस्पति (गुरु) को देवताओं का गुरु माना गया है। वे ज्ञान, भाग्य, बुद्धि, धन, विवाह, संतान और आध्यात्मिकता के कारक ग्रह हैं। जब किसी जातक की कुंडली में गुरु ग्रह कमजोर, नीच का हो या राहु-केतु (गुरु चांडाल दोष) और शनि जैसे क्रूर ग्रहों से पीड़ित हो, तो जीवन में 'गुरु दोष' का निर्माण होता है। गुरु दोष के लक्षण - यदि अथक परिश्रम के बाद भी भाग्य साथ नहीं दे रहा है, विवाह में लगातार अड़चनें आ रही हैं, धन टिक नहीं रहा है, या पेट और लिवर से जुड़ी स्वास्थ्य समस्याएं बनी हुई हैं, तो यह कमजोर गुरु का संकेत है। हमारा अनुष्ठान क्यों विशेष है? पूजा सारथी ऐप पर आयोजित होने वाला गुरु ग्रह दोष निवारण अनुष्ठान एक अत्यधिक शक्तिशाली और सात्विक वैदिक प्रक्रिया है। इस अनुष्ठान के अंतर्गत हमारे विद्वान आचार्यों द्वारा देवगुरु बृहस्पति के मूल मंत्रों का विधि-विधान से जप किया जाता है, जिससे गुरु ग्रह के नकारात्मक प्रभाव शांत होते हैं और उनकी शुभता (Positive Energy) का संचार होता है। यह पूजा मुख्य रूप से कुंडली में गुरु (बृहस्पति) के कमजोर होने, नीच का होने या "गुरु चांडाल दोष" जैसी स्थितियों को शांत करने के लिए की जाती है। जब गुरु अशुभ फल देता है, तो शिक्षा में बाधा, धन की कमी, विवाह में देरी और स्वास्थ्य (पेट या लीवर) की समस्यायें आती हैं 🌟 गुरु देव की कृपा से अपने जीवन के बंद कमरों के ताले खोलें। आज ही पूजा सारथी पर अपना स्लॉट (Slot) बुक करें!


वैदिक ज्योतिष में शुक्र देव (Planet Venus) को सुख, समृद्धि, सौंदर्य, प्रेम और ऐश्वर्य का प्रतीक माना गया है। यदि आपकी कुंडली में शुक्र ग्रह कमजोर, नीच का या राहु-केतु जैसे क्रूर ग्रहों से पीड़ित है, तो इसे 'शुक्र दोष' कहा जाता है। इस दोष के कारण जीवन में आर्थिक तंगी, वैवाहिक जीवन में कलह, मानसिक अशांति और भौतिक सुखों की कमी होने लगती है। पूजा सारथी का शुक्र ग्रह दोष निवारण अनुष्ठान एक अत्यंत प्रभावशाली और वैदिक प्रक्रिया है, जिसका उद्देश्य शुक्र देव को प्रसन्न कर उनके नकारात्मक प्रभावों को शांत करना और जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार करना है। शुक्र दोष के मुख्य लक्षण (कब कराएं यह अनुष्ठान?) यदि आप नीचे दी गई समस्याओं का सामना कर रहे हैं, तो यह अनुष्ठान आपके लिए अत्यंत लाभकारी है। कड़े परिश्रम के बाद भी आर्थिक स्थिति में सुधार न होना या लगातार धन की हानि। वैवाहिक जीवन में बिना वजह तनाव, अनबन या विवाह में अत्यधिक देरी होना। समाज में मान-सम्मान, आकर्षण और आत्मविश्वास में कमी महसूस होना। सुख-सुविधाओं के साधन (वाहन, मकान आदि) जुड़ने में बाधाएं आना। पूजा में उपयोग होने वाली सभी सात्विक सामग्रियां (सफेद चंदन, सफेद वस्त्र, अक्षत, मिश्री, कपूर, और विशेष पुष्प) पूजा सारथी द्वारा स्वयं प्रबंधित की जाती हैं। आपको किसी भी प्रकार की चिंता करने की आवश्यकता नहीं है। "सुख, सौभाग्य और ऐश्वर्य का वरदान पाएं, शुक्र देव की कृपा से जीवन को खुशहाल बनाएं।" आज ही पूजा सारथी ऐप पर अपना "शुक्र ग्रह दोष निवारण अनुष्ठान" बुक करें और जीवन में सुख-समृद्धि का स्वागत करें!


शनि ग्रह (Saturn) को न्याय का देवता और कर्मफल प्रदाता माना जाता है। जब कुंडली में शनि भारी हो, साढ़ेसाती या ढैय्या चल रही हो, तो जीवन में संघर्ष, देरी, और मानसिक तनाव बढ जाता है।


🕉️ राहु दोष निवारण मंत्र जप अनुष्ठान | पूजा सारथी क्या आपके बनते हुए काम अचानक बिगड़ जाते हैं? क्या आपको लगातार अज्ञात भय, मानसिक तनाव या भ्रम की स्थिति घेरे रहती है? ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, ये कुंडली में राहु दोष या राहु के अशुभ प्रभाव के संकेत हो सकते हैं। पूजा सारथी आपके लिए लेकर आया है पूर्णतः प्रामाणिक और विधि-विधान से संपन्न होने वाला राहु दोष निवारण मंत्र जप अनुष्ठान। हमारे अनुभवी और वैदिक विद्वान ब्राह्मणों के मार्गदर्शन में यह पूजा आपके जीवन से राहु के नकारात्मक प्रभावों को शांत कर सुख, समृद्धि और मानसिक स्पष्टता का संचार करती है। ❓ राहु दोष के मुख्य लक्षण: क्या आपको इस अनुष्ठान की आवश्यकता है? यदि आप अपने जीवन में नीचे दी गई समस्याओं का सामना कर रहे हैं, तो यह अनुष्ठान आपके लिए अत्यंत लाभकारी सिद्ध होगा। 📉 अचानक रुकावटें - सब कुछ ठीक चलते-चलते अचानक व्यापार ठप हो जाना या नौकरी पर संकट आ जाना। 🧠 मानसिक भ्रम व तनाव - सही और गलत का निर्णय न ले पाना, हर समय दिमाग में नकारात्मक विचार आना या डिप्रेशन महसूस होना। 💔 अकारण कलह - परिवार में, विशेषकर जीवनसाथी या साझेदारों (Partners) के साथ बिना किसी बड़ी वजह के गलतफहमियां और झगड़े होना। 🏥 अग्न्यात बीमारियां - ऐसी शारीरिक या मानसिक परेशानियां जिनका डॉक्टर भी सही इलाज या कारण न पकड़ पाएं। 🕵️ षड्यंत्र या बदनामी - कार्यस्थल या समाज में बिना किसी गलती के अचानक मान-हानि या गुप्त शत्रुओं का बढ़ जाना। राहु का समय कभी भी आक्रामक हो सकता है, लेकिन सही समय पर किया गया शास्त्रोक्त उपाय जीवन की दिशा बदल सकता है। आज ही पूजा सारथी पर अपना स्लॉट (Slot) बुक करें और अपने जीवन को बाधा मुक्त बनाएं।


ज्योतिष शास्त्र में केतु को एक छाया ग्रह और मोक्ष का कारक माना गया है। लेकिन यदि कुंडली में केतु अशुभ स्थान पर हो, या इसकी महादशा/अन्तर्दशा चल रही हो, तो यह जीवन में अचानक उथल-पुथल मचा देता है। बनते हुए काम अंतिम क्षण में बिगड़ना, मतिभ्रम (Confusion), चर्म रोग, और अज्ञात भय केतु दोष के मुख्य लक्षण हैं। केतु (Ketu) को मोक्ष और अध्यात्म का कारक माना जाता है, लेकिन दोष होने पर यह चर्म रोग, जोड़ों का दर्द और मानसिक भटकाव देता है। पूजा सारथी ऐप आपके लिए लेकर आया है 'वैदिक केतु दोष शांति मंत्र जप अनुष्ठान'। इस विशेष अनुष्ठान के माध्यम से केतु ग्रह के क्रूर प्रभाव को शांत किया जाता है, जिससे आपके जीवन में रुकी हुई प्रगति को दोबारा गति मिलती है। आपको यह अनुष्ठान क्यों करवाना चाहिए? (Symptoms of Ketu Dosha) यदि आप नीचे दी गई समस्याओं से जूझ रहे हैं, तो यह अनुष्ठान आपके लिए अत्यंत लाभकारी है। अचानक नुकसान - व्यापार या नौकरी में बिना किसी वजह के अचानक बाधाएं या घाटा होना। मानसिक तनाव - हर समय भ्रम की स्थिति रहना, निर्णय न ले पाना और अकेलापन महसूस होना। स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं - पैरों में चोट, रीढ़ की हड्डी में तकलीफ, या त्वचा (Skin) से जुड़े रहस्यमयी रोग। दुर्घटनाएं व शत्रु - गुप्त शत्रुओं का बढ़ना और बार-बार दुर्घटनाओं का योग बनना। केतु के अशुभ प्रभाव को कम करने के लिए इस पूजा को अनिवार्य रूप से किसी भी मंगलवार या शनिवार को शुरू करना सर्वोत्तम माना जाता है।


कुलदेवी स्तोत्रम् पाठ अनुष्ठान क्या है? (What is this Anushthan?) हर वंश और कुल की एक रक्षक देवी होती हैं, जिन्हें कुलदेवी कहा जाता है। कुलदेवी स्तोत्रम् आदि शक्ति का वह सिद्ध स्तुति-पाठ है जिसके द्वारा कुल की अधिष्ठात्री देवी को प्रसन्न किया जाता है। कई बार अनजाने में या समय के साथ लोग कुलदेवी की पूजा भूल जाते हैं, जिससे परिवार में उन्नति रुक जाती है। यह अनुष्ठान कुलदेवी के प्रति अपनी कृतज्ञता व्यक्त करने और उनके सुरक्षा कवच को परिवार के चारों ओर दोबारा सक्रिय करने का अचूक माध्यम है। यह स्तोत्र कुलदेवी को प्रसन्न कर वंश की रक्षा और बाधाओं को दूर करने के लिए अत्यंत प्रभावशाली माना जाता है। पूजा सारथी के साथ क्यों बुक करें? आपके कुल की परंपरा अनुसार - हर परिवार की कुलदेवी (जैसे बाण माता, शाकंभरी माता, जीण माता, कैला देवी आदि) के अनुसार पूजा के नियम अलग होते हैं। हमारे आचार्य आपकी पारिवारिक परंपरा के अनुसार ही विधि तय करते हैं। सिद्ध पाठ संख्या: यजमान की मन्नत या आवश्यकता के अनुसार कुलदेवी स्तोत्र के 11, 21, 51 या 108 प्रामाणिक पाठ वैदिक ब्राह्मणों द्वारा सस्वर किए जाते हैं। विशेष कुलदेवी भोग - अनुष्ठान के अंत में कुलदेवी को प्रिय विशेष पारम्परिक भोग (जैसे लापसी, हलवा-पूरी या बांकड़ी) की आहुति और अर्पण कराया जाता है। पूजा बुक करते समय रिक्वायरमेंट में अपनी 'कुलदेवी का नाम' टाइप करें, ताकि पंडित जी उसी अनुसार तैयारी करके आएं।


पंचदेव रक्षा कवच अनुष्ठान — संकटों से मुक्ति और संपूर्ण पारिवारिक सुरक्षा हमारे सनातन धर्म में पंचदेव (भगवान गणेश, भगवान शिव, भगवान विष्णु, सूर्य देव और माता दुर्गा) को सृष्टि के संचालन और संतुलन का आधार माना गया है। 'पंचदेव रक्षा कवच अनुष्ठान' एक अत्यंत प्रभावशाली और प्राचीन वैदिक प्रक्रिया है, जिसमें इन पाँचों महाशक्तियों की सामूहिक ऊर्जा का आह्वान किया जाता है। यह अनुष्ठान आपके और आपके परिवार के चारों ओर एक ऐसा सकारात्मक ऊर्जा का घेरा (कवच) तैयार करता है, जिसे कोई भी नकारात्मक शक्ति, बुरी नज़र या ग्रह दोष भेद नहीं पाती। इसका नियमित पाठ या श्रवण करने से हर दिशा में विजय प्राप्त करता एक अत्यंत प्रभावशाली आध्यात्मिक सुरक्षा कवच है, यह अनुष्ठान किसके लिए विशेष रूप से जरूरी है? जिन्हें लगातार व्यापार या नौकरी में नुकसान हो रहा हो। जिनके घर में अक्सर कलह (लड़ाई-झगड़े) या अकारण बीमारी बनी रहती हो। जिन्हें अनजाना डर, डिप्रेशन या बुरे सपने आते हों। जो अपने नए घर, व्यवसाय या नए जीवन की शुरुआत को सुरक्षित करना चाहते हैं। पूजा सारथी ऐप के माध्यम से कैसे होगी पूजा? (How it Works) अनुभवी विद्वान पंडित जी - यह अनुष्ठान हमारे अनुभवी और वैदिक आचार्यों द्वारा शास्त्रोक्त विधि से संपन्न किया जाता है। "पाँच देवों का पहरा होगा, हर संकट का अंत सुनहरा होगा।" अपने परिवार को दिव्य शक्तियों की सुरक्षा ढाल देने के लिए आज ही इस अनुष्ठान का हिस्सा बनें। और अपनी पूजा बुक करें।


ब्रह्म भोज (या ब्राह्मण भोज) हिंदू धर्म में एक पवित्र परंपरा है, जिसमें पूजा, अनुष्ठान या श्राद्ध के बाद ब्राह्मणो या योग्य व्यक्तियों को आदरपूर्वक सात्विक भोजन कराया जाता है। यह पूर्वजों की आत्मा की शांति, मोक्ष प्राप्ति और देवी-देवताओं के सम्मान हेतु किया जाता है। इसे अतिथि को भगवान का रूप मानकर पूजा और दान देने के रूप में भी देखा जाता है।


आप पूर्ण श्रद्धा के साथ श्रवण की तैयारी कीजिए, इस सात दिवसीय दिव्य अनुष्ठान की शुद्धता, मर्यादा और विधि-विधान की जिम्मेदारी पूजा सारथी (Puja Sarthi) पर छोड़ दीजिए। हमारे परम विद्वान, सदाचारी और वेदांती पंडित जी आपके घर या निश्चित स्थान पर आकर संपूर्ण नियमों के साथ इस महापाठ को संपन्न कराएंगे। ✨ इस दिव्य अनुष्ठान में क्या-क्या शामिल है? (What's Included) जब आप हमारे ऐप से 'श्रीमद्भागवत मूल पाठ' बुक करते हैं, तो आपको एक अत्यंत गरिमामयी और प्रामाणिक सेवा मिलती है। विद्वान एवं सदाचारी ब्राह्मण - भागवत के मर्मज्ञ, शुद्ध कंठ और शास्त्रों के ज्ञाता पंडित जी। दिव्य पोथी स्थापना एवं कलश पूजन - प्रथम दिन भव्य मंगल कलश स्थापना और भागवत जी की महापूजा। 7 दिवसीय मूल पाठ (सस्वर) - प्रतिदिन नियम और निष्ठा के साथ श्रीमद्भागवत के सभी 12 स्कंधों और 18,000 श्लोकों का दिव्य पाठ। दशम स्कंध विशेष प्रसंग - भगवान श्रीकृष्ण के प्राकट्य (कृष्ण जन्म), माखन चोरी, गोवर्धन लीला और रासलीला के प्रसंगों पर विशेष पूजन और आरती। दैनिक एवं अंतिम दिन का हवन-पूजन - पाठ की पूर्णता पर विधि-विधान से यज्ञ, पूर्णाहुति और महाआरती। 🌟 पूजा सारथी (Puja Sarthi) को ही क्यों चुनें? पूर्ण शास्त्रीय मर्यादा: आसन, खान-पान और ब्रह्मचर्य के सभी नियमों का पालन करते हुए उच्च कोटि के ब्राह्मणों द्वारा पाठ। तनावमुक्त व्यवस्था - बुकिंग के तुरंत बाद आपको कलश, पोथी स्थापना और सात दिनों की आवश्यक व्यवस्थाओं की पूरी सूची ऐप पर मिल जाएगी। घर बैठे परम लाभ - आपके पूरे परिवार के लिए जीवन का सबसे बड़ा पुण्य अर्जन करने का सरल माध्यम। 📅 अनुष्ठान की अवधि कुल समय - 7 दिवसीय निरंतर अनुष्ठान (प्रतिदिन लगभग 4 से 5 घंटे का सस्वर पाठ) तिथि - आप अपने परिवार की सुविधा और उत्तम शुभ मुहूर्त के अनुसार इस सात दिवसीय अनुष्ठान की शुरुआत की तिथि चुन सकते हैं। "कृष्णाय वासुदेवाय हरये परमात्मने। प्रणतक्लेशनाशाय गोविंदाय नमो नमः॥" अपने घर को साक्षात गोकुलधाम बनाने और बंसीधर की असीम कृपा पाने के लिए आज ही अपना शुभ अनुष्ठान स्लॉट सुरक्षित करें। 🟢 अभी अपना पावन अनुष्ठान बुक करें ।


🏛️ अनुष्ठान का परिचय एवं पौराणिक महत्व श्रीमद्भागवत महापुराण के आठवें स्कंध में वर्णित गजेंद्र मोक्ष की कथा केवल एक पौराणिक कथा नहीं है, बल्कि यह हर उस मनुष्य की कहानी है जो संसार के दुखों और संकटों के दलदल में फंसा हुआ है। पौराणिक काल में जब त्रिकूट पर्वत के घने जंगलों में रहने वाले बलशाली हाथियों के राजा 'गजेंद्र' का पैर एक शक्तिशाली मगरमच्छ (ग्राह) ने पकड़ लिया, तो गजेंद्र ने एक हजार वर्षों तक अपने बल पर संघर्ष किया। जब उनके परिवार, मित्रों और उनका स्वयं का शारीरिक बल निष्फल हो गया और वे मृत्यु के मुहाने पर पहुंच गए, तब उन्होंने अपनी बुद्धि और अहंकार को त्याग कर परमेश्वर को पुकारा। गजेंद्र ने पूर्व जन्म के संस्कारों से जागृत होकर भगवान विष्णु की स्तुति की, जिसे गजेंद्र मोक्ष स्तोत्र कहा जाता है। इस करुण पुकार को सुनते ही भगवान श्री हरि विष्णु गरुड़ पर सवार होकर तुरंत प्रकट हुए और अपने सुदर्शन चक्र से ग्राह का वध कर गजेंद्र को मृत्यु के मुख से बाहर निकाला (मोक्ष प्रदान किया)। पूजा सारथी का यह विशेष अनुष्ठान आपके जीवन में आने वाले उसी 'ग्राह' (संकट, कर्ज, बीमारी या अदृश्य बाधा) रूपी बंधन को काटने के लिए आयोजित किया जाता है। 🎯 किन जातकों को यह अनुष्ठान अनिवार्य रूप से कराना चाहिए? "जब संसार के सारे सहारे छूट जाएं, तब गोविंद का हाथ थामें। आज ही पूजा सारथी के साथ जुड़कर गजेंद्र मोक्ष अनुष्ठान का संकल्प लें।" जो लोग अत्यधिक कर्ज (Debt) के नीचे दबे हुए हैं और हर कोशिश के बाद भी कर्ज नहीं उतर रहा। जो किसी गंभीर कानूनी मामले, पुलिस केस या विभागीय जांच (Departmental Inquiry) का सामना कर रहे हैं। जिन जातकों की कुंडली में 'केतु' या 'राहु' की महादशा चल रही हो और जीवन में अचानक अप्रत्याशित (Unexpected) परेशानियां आ रही हों। यदि व्यापार या नौकरी में चारों तरफ से रास्ते बंद नजर आ रहे हों। गंभीर या असाध्य बीमारियों से पीड़ित जातकों के लिए, जो मौत से जंग लड़ रहे हों।


सनातन धर्म में माँ अन्नपूर्णा को संपूर्ण सृष्टि के पोषण की अधिष्ठात्री देवी माना गया है। वे साक्षात माता पार्वती का ही स्वरूप हैं, जो अपने भक्तों को कभी भूखा या दरिद्र नहीं रहने देतीं। पौराणिक कथा के अनुसार, जब एक बार पृथ्वी पर अन्न और जल का अकाल पड़ गया, तब समस्त जीव तड़पने लगे। यहाँ तक कि संसार के चक्र को चलाने के लिए स्वयं भगवान शिव को भी एक भिक्षुक के रूप में माता अन्नपूर्णा के द्वार पर आना पड़ा और संसार के भरण-पोषण के लिए उनसे भिक्षा मांगनी पड़ी। आदि गुरु शंकराचार्य जी ने काशी में माता अन्नपूर्णा की इसी दिव्य महिमा से अभिभूत होकर अत्यंत कल्याणकारी अन्नपूर्णा स्तोत्र की रचना की थी। पूजा सारथी का यह अनुष्ठान आपके घर या कार्यस्थल को केवल भौतिक अन्न-धन से ही नहीं भरता, बल्कि वहाँ रहने वाले सदस्यों को आत्मिक संतोष, उत्तम स्वास्थ्य और मानसिक शांति भी प्रदान करता है। 🎯 किन जातकों को यह अनुष्ठान अनिवार्य रूप से कराना चाहिए? जिनके घरों में लगातार आर्थिक तंगी बनी रहती है और हर समय पैसों की किल्लत महसूस होती है। जो लोग नया बिजनेस (विशेषकर फूड, होटल, कैटरिंग या डेयरी से जुड़ा व्यवसाय) शुरू कर रहे हैं। यदि नए घर का निर्माण हुआ है और आप गृह प्रवेश से पहले या बाद में घर में समृद्धि का वास चाहते हैं। कुंडली में 'चंद्रमा' या 'शुक्र' ग्रह पीड़ित हो, जिसके कारण सुख-सुविधाओं और मानसिक शांति में कमी आ रही हो। जो अपने परिवार को मानसिक संतोष, ज्ञान और सात्विक जीवन शैली की ओर ले जाना चाहते हैं। "जिस घर पर हो माँ अन्नपूर्णा का हाथ, वहाँ कभी न छूटे लक्ष्मी का साथ। आज ही पूजा सारथी ऐप पर अपना अनुष्ठान बुक करें।"


🏛️ अनुष्ठान का परिचय एवं पौराणिक महत्व वाल्मीकि रामायण के युद्धकांड में वर्णित आदित्य हृदय स्तोत्र केवल एक स्तुति नहीं, बल्कि साक्षात लंकापति रावण पर विजय प्राप्त करने वाला अमोघ अस्त्र है। त्रेतायुग में जब मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्री राम और रावण के बीच महायुद्ध चल रहा था, तब लगातार युद्ध करने के कारण श्री राम मानसिक रूप से थक चुके थे और चिंतामग्न थे। ठीक उसी समय रणभूमि में परम ज्ञानी महर्षि अगस्त्य प्रकट हुए। उन्होंने श्री राम को रावण पर विजय प्राप्त करने के लिए भगवान सूर्य नारायण की गुप्त और परम पवित्र स्तुति का उपदेश दिया, जिसे 'आदित्य हृदय स्तोत्र' कहा जाता है। महर्षि अगस्त्य के कहे अनुसार भगवान श्री राम ने आचमन करके तीन बार इस स्तोत्र का पाठ किया, जिससे उनके भीतर असीमित ऊर्जा, अदम्य साहस और दिव्य तेज का संचार हुआ और उन्होंने रावण का समूल नाश किया। पूजा सारथी का यह विशेष अनुष्ठान आपके जीवन के हर उस 'युद्ध' (जैसे- करियर का संघर्ष, अदालती मामले, मानसिक अवसाद या सरकारी काम में आ रही बाधाएं) को जीतने के लिए आयोजित किया जाता है, जहाँ आप खुद को अकेला या थका हुआ महसूस कर रहे हैं। 🎯 किन जातकों को यह अनुष्ठान अनिवार्य रूप से कराना चाहिए? जो लोग किसी बड़े कानूनी मामले या राजनीतिक/सामाजिक षड्यंत्र का सामना कर रहे हैं। जो छात्र उच्च प्रशासनिक सेवाओं या सरकारी नौकरियों (Civil Services) में सफलता पाना चाहते हैं। जिनकी कुंडली में सूर्य देव राहु-केतु से पीड़ित होकर 'ग्रहण दोष' बना रहे हों, या तुला राशि (नीच) में स्थित हों। यदि व्यापार या नौकरी में अथक प्रयास के बाद भी बार-बार असफलता मिल रही हो और आत्मविश्वास पूरी तरह टूट चुका हो। हृदय रोग या आंखों की कमजोरी से जूझ रहे जातकों के लिए शारीरिक बल बढ़ाने हेतु। "उगते सूर्य की ऊर्जा से अपने भीतर के विजेता को जगाएं। आज ही पूजा सारथी ऐप पर 'आदित्य हृदय स्तोत्र पाठ अनुष्ठान' बुक करें और अजेय बनें।"


🏛️ अनुष्ठान का परिचय एवं पौराणिक महत्व नारद पुराण में वर्णित 'संकट नाशन गणेश स्तोत्र' (जिसे 'संकटहरण गणेश स्तोत्र' भी कहा जाता है) भगवान विनायक की कृपा प्राप्त करने का सबसे सरल और अचूक माध्यम है। स्वयं देवर्षि नारद ने संसार के मनुष्यों को संकटों से उबारने के लिए इस स्तोत्र की रचना की थी। शास्त्रों के अनुसार, भगवान गणेश 'प्रथम पूज्य' और 'विघ्नहर्ता' हैं। इसका अर्थ यह है कि सृष्टि में किसी भी शुभ कार्य की शुरुआत या किसी बड़े संकट के समय सबसे पहले गणपति जी की ही आराधना की जाती है। इस स्तोत्र में भगवान गणेश के 12 अत्यंत दिव्य नामों (जैसे- वक्रतुंड, एकदंत, कृष्णपिंगाक्ष, लंबोदर, विकट, विघ्नराजेन्द्र, धुम्रवर्ण, भालचंद्र, गजानन, विनायक, गणपति और गजाधिप) का स्मरण किया जाता है। इन 12 नामों का स्मरण और स्तोत्र का पाठ जातक के चारों तरफ एक ऐसा सुरक्षा चक्र बनाता है, जिसे कोई भी नकारात्मक शक्ति या बाधा भेद नहीं सकती। पूजा सारथी का यह विशेष अनुष्ठान आपके जीवन के उन सभी ज्ञात-अज्ञात अवरोधों को जड़ से समाप्त करने के लिए आयोजित किया जाता है, जो आपकी प्रगति की राह में बाधा बने हुए हैं। 🎯 किन जातकों को यह अनुष्ठान अनिवार्य रूप से कराना चाहिए? जिनके कार्यों में बार-बार अंतिम समय पर विघ्न या रुकावटें आ जाती हैं। जो छात्र किसी बड़ी प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी कर रहे हैं और मन एकाग्र नहीं हो पा रहा। जो लोग नया व्यवसाय, दुकान, कार्यालय शुरू करने जा रहे हैं या नए घर में प्रवेश कर रहे हैं। कुंडली में 'बुध' या 'केतु' ग्रह पीड़ित हो, जिसके कारण निर्णय क्षमता कमजोर हो रही हो या मतिभ्रम (Confusion) रहता हो। जो जातक कर्ज, बीमारी या किसी बड़े कोर्ट-कचहरी के संकट से तुरंत राहत पाना चाहते हैं। "प्रथम पूज्य देव की कृपा पाएँ, जीवन के सारे विघ्न मिटाएँ। आज ही पूजा सारथी ऐप पर 'श्री गणेश संकट नाशन स्तोत्र पाठ अनुष्ठान' बुक करें।"